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MDR चार्ज कितना लगता है? कार्ड मशीन और UPI पर दुकानदार के मुनाफ़े का हिसाब

भारत में नकद, ₹2,000 तक के UPI पेमेंट और RuPay डेबिट कार्ड पर दुकानदार से कोई MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) नहीं लिया जा सकता। Visa या Mastercard डेबिट कार्ड पर छोटे दुकानदार का ज़्यादा से ज़्यादा 0.40% कटता है, और क्रेडिट कार्ड पर आम तौर पर 1.5% से 2.5%, ऊपर से इस चार्ज पर 18% GST। चार्ज बिक्री की रकम पर लगता है, पर कटता आपके मुनाफ़े से है: ₹800 की जिस चीज़ की लागत ₹560 है, उस पर क्रेडिट कार्ड का 1.99% + GST यानी ₹18.79 कटता है, जो ₹240 के मार्जिन का 7.8% है।

नीचे एक ही उदाहरण के आँकड़ों से पूरा हिसाब लगाया गया है: हर भुगतान तरीके का खर्च, महीने का कुल चार्ज, बैंक में बिक्री से कम पैसा क्यों आता है, और क्या यह चार्ज ग्राहक से लिया जा सकता है।

किस पेमेंट पर दुकानदार को कितना चार्ज लगता है?

यह टेबल अक्टूबर 2026 के सरकारी नियमों और कंपनियों की सार्वजनिक रेट लिस्ट से बनी है। कार्ड मशीन की असली दर आपके बैंक या कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट, दुकान की कैटेगरी और टर्नओवर पर निर्भर करती है, इसलिए पक्का आँकड़ा अपने सेटलमेंट स्टेटमेंट में देखें। Paytm का उदाहरण इसलिए दिया गया है कि वह अपनी कार्ड मशीन (EDC) की रेट लिस्ट खुलेआम छापता है; ज़्यादातर दूसरी कंपनियों की दरें कॉन्ट्रैक्ट में तय होती हैं।

भुगतान का तरीकादुकानदार का चार्ज (GST अलग)ध्यान रखें
नकद0कोई चार्ज नहीं
UPI, ₹2,000 तक0कानून के मुताबिक बैंक या पेमेंट कंपनी इस पर कोई चार्ज नहीं ले सकती
UPI, ₹2,000 से ऊपरअभी 0; दिवाली के बाद 0.4% (एक पेमेंट पर ज़्यादा से ज़्यादा ₹300)छोटे दुकानदार (P2PM) पर 0 ही रहेगा, नीचे का नोट देखें। पेट्रोल पंप, खेती के सामान जैसी कुछ कैटेगरी में ₹5 प्रति पेमेंट
RuPay डेबिट कार्ड0कानून के मुताबिक, रकम चाहे जितनी हो
Visa, Mastercard डेबिट कार्डपिछले साल का टर्नओवर ₹20 लाख तक: ज़्यादा से ज़्यादा 0.40% (एक लेन-देन पर ₹200 तक) · उससे ज़्यादा: ज़्यादा से ज़्यादा 0.90% (₹1,000 तक)कार्ड मशीन के लिए RBI की तय सीमा (QR से कार्ड पेमेंट पर 0.30% / 0.80%)। Paytm: छोटे दुकानदार 0.40%; बड़े दुकानदार ₹2,000 तक 0.40%, उससे ऊपर 0.90%
क्रेडिट कार्ड (Visa, Mastercard, RuPay)आम तौर पर 1.5%–2.5%, कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिककोई सरकारी सीमा नहीं। Paytm: किराना 1.40%, ज़्यादातर दूसरी दुकानें 1.99%
UPI से RuPay क्रेडिट कार्डकॉन्ट्रैक्ट और टर्नओवर के मुताबिकUPI के 0.4% वाले नियम में नहीं आता, इस पर क्रेडिट कार्ड के नियम चलते हैं। Paytm: छोटे दुकानदार ₹2,000 तक 0, उससे ऊपर 1.99%; बड़े दुकानदार हर रकम पर 1.99%
American Express, विदेशी कार्डPaytm: Amex 2.75%, विदेशी कार्ड 3.50%होटल, लॉज जैसी कैटेगरी में Amex 3.99%

UPI पर नया MDR: वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर 2026 की अधिसूचना में RuPay डेबिट कार्ड और ₹2,000 तक के UPI पेमेंट को हर चार्ज से बाहर रखा, और NPCI ने ₹2,000 से ऊपर के, दुकानों को होने वाले (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4% MDR तय किया, जो 15 अक्टूबर से लागू होना था। 13 अक्टूबर को NPCI ने त्योहारों को देखते हुए इसे दिवाली के तुरंत बाद तक टाल दिया; नई तारीख़ अलग से घोषित होगी। जो छोटे दुकानदार UPI QR से अपने निजी बैंक खाते में महीने में ₹1 लाख तक पाते हैं (P2PM), उन पर कोई MDR नहीं लगेगा, पेमेंट चाहे ₹2,000 से बड़ा हो; लगातार 3 महीने ₹1 लाख से ज़्यादा आने पर खाता P2M में बदल दिया जाता है। नियम अभी लागू नहीं हुआ है, इसलिए ये शर्तें बदल भी सकती हैं। नियम लागू होने के बाद P2M दुकान को मिले ₹3,000 के UPI पेमेंट पर ₹12 MDR और उस पर 18% GST, यानी ₹14.16 कटेंगे।

दर के अलावा कार्ड मशीन या साउंडबॉक्स का किराया भी लग सकता है; Paytm यह किराया सेटलमेंट की रकम से काटता है। मशीन लेने से पहले प्लान की शर्तें देख लें।

MDR पर 18% GST अलग से लगता है: Paytm की रेट लिस्ट GST के बिना है, और Google Pay for Business भी MDR पर 18% GST लगाता है। इसलिए 1.99% का असली खर्च 1.99% × 1.18 ≈ 2.348% बनता है। GST में रजिस्टर्ड जो दुकान सामान्य तरीके से टैक्स भरती है, वह इस GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ले सकती है, बशर्ते बैंक या कंपनी से टैक्स इनवॉइस मिला हो और उसने इसे अपने GST रिटर्न में दिखाया हो। जो हिस्सा GST-मुक्त सामान (जैसे खुला अनाज, दूध, ताज़ी सब्ज़ी) की बिक्री से जुड़ा है, उस पर ITC नहीं मिलता। कंपोज़िशन स्कीम वाली दुकान ITC नहीं ले सकती (CGST एक्ट की धारा 10(4)), और जो दुकान रजिस्टर्ड ही नहीं है (ज़्यादातर राज्यों में सामान बेचने वालों के लिए ₹40 लाख तक के टर्नओवर पर रजिस्ट्रेशन ज़रूरी नहीं), उसके लिए भी यह GST सीधा खर्च है। नीचे का हिसाब ऐसी ही दुकान का है, इसलिए दरों में GST जोड़ा गया है।

चार्ज बिक्री पर लगता है, पर कटता मुनाफ़े से है

MDR बिक्री की पूरी रकम पर लगता है, इसलिए 1–2% मामूली लगता है। लेकिन दुकानदार की असली कमाई मार्जिन है, यानी बिक्री मूल्य में से माल की ख़रीद लागत घटाकर जो बचता है, और चार्ज इसी मार्जिन में से जाता है।

मान लीजिए एक चीज़ ₹800 में बिकती है और उसकी ख़रीद लागत ₹560 है। इस बिक्री पर मार्जिन ₹240 है:

रकम ₹ में। दरें GST समेत: डेबिट 0.40% + GST = 0.472%, क्रेडिट कार्ड 1.99% + GST = 2.348%, विदेशी कार्ड 3.50% + GST = 4.13%। “बचा” में से अभी किराया, तनख़्वाह और दूसरे खर्च नहीं घटे हैं, यह शुद्ध मुनाफ़ा नहीं है।
नकद / UPI / RuPay डेबिटVisa, Mastercard डेबिटक्रेडिट कार्डविदेशी कार्ड
ग्राहक ने दिए800800800800
चार्ज (GST समेत)03.7818.7933.04
दुकानदार को मिले800796.22781.21766.96
लागत और चार्ज के बाद बचा240236.22221.21206.96
चार्ज मार्जिन का कितना हिस्सा0%1.6%7.8%13.8%

मार्जिन का कितना हिस्सा चार्ज में जाता है, यह एक सीधे फ़ॉर्मूले से निकलता है: चार्ज का मार्जिन में हिस्सा = चार्ज की दर ÷ मार्जिन %। ऊपर के उदाहरण में मार्जिन 240 ÷ 800 = 30% है, तो क्रेडिट कार्ड का 2.348% ÷ 30% ≈ 7.8%। मार्जिन जितना पतला होगा, उतना ही बड़ा हिस्सा कटेगा:

हर ख़ाने में: चार्ज मार्जिन का कितना प्रतिशत खा जाता है। दरें GST समेत हैं; किराना वाली 1.652% दर Paytm की 1.40% पर GST जोड़कर बनी है।
मार्जिन %डेबिट 0.472%किराना क्रेडिट 1.652%क्रेडिट 2.348%विदेशी कार्ड 4.13%
10%4.7%16.5%23.5%41.3%
20%2.4%8.3%11.7%20.7%
30%1.6%5.5%7.8%13.8%
40%1.2%4.1%5.9%10.3%
50%0.9%3.3%4.7%8.3%

अगर आपका मार्जिन 10–20% है, तो किराना वाला 1.40% क्रेडिट कार्ड चार्ज भी GST समेत हर ₹100 मार्जिन में से करीब ₹8 से ₹17 ले जाता है। 50% मार्जिन वाले सामान पर यही दर सिर्फ़ ₹3.30 लेती है।

महीने में कुल कितना चार्ज कटता है?

महीने का चार्ज पूरी बिक्री को किसी एक दर से गुणा करके नहीं निकलता। हर भुगतान तरीके का चार्ज अलग से निकालकर जोड़ना होता है, और नकद, UPI और RuPay डेबिट वाला हिस्सा शून्य रहता है। मान लीजिए एक छोटी दुकान (पिछले साल का टर्नओवर ₹20 लाख से कम) को महीने में ₹1,20,000 डिजिटल पेमेंट से मिलते हैं, और हर पेमेंट ₹2,000 से कम का है:

रकम ₹ में। दरें GST समेत; क्रेडिट कार्ड के लिए Paytm की 1.99% वाली दर ली गई है, यानी 1.99% × 1.18 ≈ 2.348%।
भुगतान का तरीकाइस महीने मिलेदरचार्ज
UPI80,00000
RuPay डेबिट10,00000
Visa, Mastercard डेबिट10,0000.472%47.20
क्रेडिट कार्ड20,0002.348%469.64
कुल1,20,000516.84

यह दुकान महीने में करीब ₹517 और साल में करीब ₹6,200 चार्ज देती है। पूरे डिजिटल पेमेंट पर यह औसतन 0.43% ही है, क्योंकि ज़्यादातर पैसा UPI से आया। लेकिन क्रेडिट कार्ड, जिससे डिजिटल पेमेंट का सिर्फ़ छठा हिस्सा आया, कुल चार्ज का 90% से ज़्यादा है। अपनी दुकान की रकम और दरें डालकर यही हिसाब लगाइए।

बैंक में बिक्री से कम पैसा क्यों आता है?

कार्ड मशीन या पेमेंट कंपनी पैसा भेजने से पहले MDR और उस पर लगा GST काट लेती है। Paytm के मुताबिक सेटलमेंट की रकम = मिले पेमेंट − कमीशन − कमीशन पर 18% GST − दूसरी कटौतियाँ (मशीन का किराया, रिफ़ंड, चार्जबैक)। बिलिंग मशीन या ऐप में ग्राहक की दी हुई पूरी रकम दर्ज होती है, इसलिए दोनों में फ़र्क आना सामान्य है; यही फ़र्क चार्ज है।

  • हिसाब में बिक्री ग्राहक की दी हुई पूरी रकम पर लिखें और MDR को अलग खर्च की तरह दर्ज करें। तब ग्राहक के कार्ड से पेमेंट करने पर बिक्री कम नहीं दिखेगी, और महीने का चार्ज भी साफ़ दिखेगा।
  • पैसा अलग-अलग समय पर आता है। जिस UPI QR का पैसा सीधे आपके बैंक खाते में जाता है, वह 24 घंटे, सातों दिन तुरंत आ जाता है। Paytm जैसी कंपनी के ज़रिये आया पैसा पहले उसके पूल खाते में जाता है और सेटलमेंट साइकिल से आपके खाते में आता है: Paytm के सेटलमेंट दस्तावेज़ के मुताबिक आम तौर पर रात 12 बजे तक का पैसा अगले दिन (T+1), और उसी दिन चाहिए तो अलग फ़ीस। आपकी मशीन का साइकिल कॉन्ट्रैक्ट में लिखा होता है। महीने के आख़िर में हिसाब मिलाते समय ध्यान रखें कि कुछ पैसा अभी रास्ते में हो सकता है।
  • रिफ़ंड करने पर चार्ज वापस मिलेगा या नहीं, यह कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर है। Paytm के EDC एग्रीमेंट में साफ़ लिखा है कि रिफ़ंड, चार्जबैक या विवाद होने पर भी MDR वापस नहीं होगा। दूसरी कंपनियों के नियम हमें सार्वजनिक रूप से नहीं मिले; मशीन लेते समय पूछ लें।

क्या कार्ड का चार्ज ग्राहक से ले सकते हैं?

नहीं। “कार्ड पर 2% एक्स्ट्रा” या “₹200 से कम पर कार्ड नहीं” जैसे बोर्ड इन नियमों के ख़िलाफ़ हैं:

  • डेबिट कार्ड: RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि उनसे जुड़े दुकानदार डेबिट कार्ड पेमेंट पर MDR ग्राहक पर न डालें।
  • Visa कार्ड: Visa के नियमों (18 अप्रैल 2026 संस्करण, नियम 1.5.5.2) के मुताबिक दुकानदार तय या सामान्य कीमत के ऊपर कुछ नहीं जोड़ सकता, जब तक देश का कानून साफ़ तौर पर यह न कहे कि दुकानदार को सरचार्ज लेने दिया जाए। न्यूज़ीलैंड में कुछ शर्तों पर, और कनाडा व अमेरिका में सिर्फ़ क्रेडिट कार्ड पर इसका अपवाद है; यूरोप में सरचार्ज ग्राहक को पहले बताना और उसकी मंज़ूरी लेना ज़रूरी है। भारत के लिए कोई अपवाद नहीं है। नियम 1.5.5.1 कार्ड लेने के लिए न्यूनतम या अधिकतम रकम तय करने से भी रोकता है।
  • मशीन का कॉन्ट्रैक्ट: Paytm के EDC एग्रीमेंट में दुकानदार को सामान असली कीमत पर, बिना किसी सरचार्ज या अतिरिक्त चार्ज के बेचना होता है, और लेन-देन की न्यूनतम या अधिकतम रकम तय नहीं की जा सकती।
  • UPI: वित्त मंत्रालय के मुताबिक दुकानदार UPI का MDR ग्राहक पर नहीं डाल सकते, और NPCI के नियमों के तहत दुकानदार का बैंक या ऐप इसे रोकने के लिए ज़िम्मेदार है।

एक बात साफ़ नहीं है: पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A सीधे बैंकों और पेमेंट कंपनियों पर लागू होती है, आम दुकानदार पर नहीं। वकीलों के मुताबिक दुकानदार पर यह रोक बैंक या ऐप के कॉन्ट्रैक्ट, NPCI के नियमों, RBI के निर्देशों या उपभोक्ता कानून के रास्ते लागू हो सकती है। जो भी रास्ता हो, सरचार्ज लेना आपके मशीन के कॉन्ट्रैक्ट और कार्ड नेटवर्क के नियमों के ख़िलाफ़ है।

सुरक्षित तरीका है कि चार्ज को शुरू से ही कीमत में जोड़ लें: अगर बिक्री का दसवाँ हिस्सा क्रेडिट कार्ड से आता है और उसकी दर GST समेत 2.348% है, तो सभी कीमतें करीब 0.24% बढ़ाने से चार्ज निकल आता है।

कार्ड लेना फ़ायदे का सौदा है या नहीं? ब्रेक-ईवन से समझिए

कार्ड लेने की लागत उसका चार्ज है, और फ़ायदा वे ग्राहक हैं जो “कार्ड नहीं चलेगा तो नहीं ख़रीदेंगे”। दोनों बराबर कब होते हैं, यह भी उसी फ़ॉर्मूले से निकलता है: कार्ड की वजह से होने वाली अतिरिक्त बिक्री (कार्ड बिक्री के प्रतिशत में) = चार्ज की दर ÷ मार्जिन %।

30% मार्जिन और क्रेडिट कार्ड की 2.348% दर पर, हर ₹10,000 की कार्ड बिक्री पर करीब ₹235 चार्ज कटता है। अगर इसमें से कम से कम ₹783 (7.8%) की बिक्री सिर्फ़ इसलिए हुई कि आप कार्ड लेते हैं, तो उस बिक्री का मार्जिन पूरा चार्ज चुका देता है।

भारत में यह फ़ैसला थोड़ा अलग है, क्योंकि ग्राहक के पास अक्सर एक मुफ़्त विकल्प, UPI, मौजूद होता है। अगर कार्ड से पेमेंट करने वाला ग्राहक वैसे भी UPI से पेमेंट कर देता, तो कार्ड का चार्ज सीधा खर्च है। अगर आपके यहाँ बड़े बिल बनते हैं, पर्यटक आते हैं, या ग्राहक क्रेडिट कार्ड से ही पेमेंट करना चाहते हैं, तो अतिरिक्त बिक्री इस प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। UPI पर RuPay क्रेडिट कार्ड नहीं लेना चाहते, तो Google Pay for Business जैसे ऐप में इसे बंद करने का विकल्प है।

अपनी असली दर कैसे पता करें?

सबसे सही आँकड़ा सेटलमेंट रिपोर्ट या बैंक स्टेटमेंट में होता है: महीने भर का MDR और उस पर लगा GST जोड़कर उस महीने की कार्ड बिक्री से भाग दें, आपकी असली दर निकल आएगी। डेबिट, क्रेडिट और विदेशी कार्ड को अलग-अलग कॉलम में रखें, क्योंकि उनकी दरें अलग हैं; महीने के आख़िर में दिख जाएगा कि कौन-सा तरीका सबसे महँगा है। GST में रजिस्टर्ड हैं, तो MDR के टैक्स इनवॉइस भी सँभालकर रखें, क्योंकि ITC के लिए वही चाहिए; Google Pay for Business जैसे ऐप ये इनवॉइस ऐप में ही दिखाते हैं।

अगर आप iPad पर बिलिंग करते हैं, तो यह हिसाब बिलिंग ऐप से भी करवा सकते हैं। DingPOS में सेटिंग्ज़ → भुगतान के तरीके में हर तरीके का प्रोसेसिंग शुल्क भरें: प्रतिशत, हर लेन-देन पर तय रकम, या दोनों। दर GST समेत भरें, जैसे 1.99% की जगह 2.348%, क्योंकि कंपनी सेटलमेंट से GST समेत काटती है; ITC लेते हैं, तो वह GST बाद में रिटर्न में वापस मिल जाता है। जो कंपनी Paytm की तरह रिफ़ंड पर MDR नहीं लौटाती, उसके तरीके में “रिफ़ंड पर प्रतिशत शुल्क वापस मिलता है” बंद कर दें। इसके बाद आँकड़े में भुगतान के तरीके कार्ड हर तरीके का अनुमानित शुल्क और अनुमानित शुद्ध प्राप्ति दिखाता है। DingPOS ख़ुद पेमेंट नहीं लेता और कंपनी का स्टेटमेंट नहीं पढ़ता; ये आँकड़े आपकी भरी हुई दर से लगाए गए अनुमान हैं, असली रकम स्टेटमेंट में ही मिलेगी।

सेटअप का तरीका क्या DingPOS कार्ड और मोबाइल भुगतान का शुल्क ट्रैक कर सकता है? में देखें। यह सुविधा Standard प्लान या उससे ऊपर में है; प्लान की तुलना प्लान और क़ीमत पेज पर है, और शुरुआत 30 दिन के मुफ़्त ट्रायल से कर सकते हैं।

आख़िरी जाँच: 2026-10-25